सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 1930

नंबर 1930किताब 30, नंबर 38
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ صَالِحٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، حَدَّثَنَا يُونُسُ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ عُرْوَةَ، وَأَبِي، بَكْرٍ قَالَتْ عَائِشَةُ ـ رضى الله عنها ـ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يُدْرِكُهُ الْفَجْرُ ‏{‏جُنُبًا‏}‏ فِي رَمَضَانَ، مِنْ غَيْرِ حُلُمٍ فَيَغْتَسِلُ وَيَصُومُ‏.‏
Narrated `Aisha:(At times) in Ramadan the Prophet (ﷺ) used to take a bath in the morning not because of a wet dream and would continue his fast

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 30 · Fasting

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।