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सहीह बुख़ारी

नंबर 1896

नंबर 1896किताब 30, नंबर 6
حَدَّثَنَا خَالِدُ بْنُ مَخْلَدٍ، حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ بِلاَلٍ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو حَازِمٍ، عَنْ سَهْلٍ ـ رضى الله عنه ـ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏ "‏ إِنَّ فِي الْجَنَّةِ بَابًا يُقَالُ لَهُ الرَّيَّانُ، يَدْخُلُ مِنْهُ الصَّائِمُونَ يَوْمَ الْقِيَامَةِ، لاَ يَدْخُلُ مِنْهُ أَحَدٌ غَيْرُهُمْ يُقَالُ أَيْنَ الصَّائِمُونَ فَيَقُومُونَ، لاَ يَدْخُلُ مِنْهُ أَحَدٌ غَيْرُهُمْ، فَإِذَا دَخَلُوا أُغْلِقَ، فَلَمْ يَدْخُلْ مِنْهُ أَحَدٌ ‏"‏‏.‏
सह्ल -रज़ियल्लाहु अनहु- का वर्णन है कि अल्लाह के नबी -सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम- ने फ़रमाया है : "जन्नत में एक द्वार है, जिसे रय्यान कहा जाता है। क़यामत के दिन उससे रोज़ेदार प्रवेश करेंगे। उनके सिवा कोई उस द्वार से प्रवेश नहीं करेगा। कहा जाएगा : रोज़ेदार कहाँ हैं? अतः, वे उठ खड़े होंगे। उनके सिवा कोई उससे प्रवेश नहीं करेगा। जब वे दाख़िल हो जाएँगे, तो द्वार बंद कर दिया जाएगा और उससे कोई अंदर नहीं जाएगा।"

तर्जुमा: HadeethEnc.comइसकी तशरीह

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

जहाँ तर्जुमा शुदा नबवी हदीसों के इनसाइक्लोपीडिया (HadeethEnc.com) में किसी रिवायत का हूबहू टेक्स्ट मौजूद है, वहाँ उसका तर्जुमा उसी रिवायत के नीचे स्रोत के नाम के साथ दिखाया गया है। दोनों को प्रोग्राम के ज़रिए, सिर्फ़ अरबी टेक्स्ट की बुनियाद पर जोड़ा गया है: इनसाइक्लोपीडिया की हदीस का पूरा टेक्स्ट, उसमें दर्ज सहाबी के नाम समेत, रिवायत का आख़िरी हिस्सा है, हर्फ़-ब-हर्फ़। इस जोड़ को किसी ने नहीं जाँचा है, और सबील के जायज़ाकारों ने तर्जुमे की जाँच नहीं की है। असल टेक्स्ट अरबी है।

किताब 30 · Fasting

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।