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सहीह बुख़ारी

नंबर 129

नंबर 129किताब 3, नंबर 71
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، قَالَ حَدَّثَنَا مُعْتَمِرٌ، قَالَ سَمِعْتُ أَبِي قَالَ، سَمِعْتُ أَنَسًا، قَالَ ذُكِرَ لِي أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم قَالَ لِمُعَاذٍ ‏"‏ مَنْ لَقِيَ اللَّهَ لاَ يُشْرِكُ بِهِ شَيْئًا دَخَلَ الْجَنَّةَ ‏"‏‏.‏ قَالَ أَلاَ أُبَشِّرُ النَّاسَ قَالَ ‏"‏ لاَ، إِنِّي أَخَافُ أَنْ يَتَّكِلُوا ‏"‏‏.‏
Narrated Anas:I was informed that the Prophet (ﷺ) had said to Mu`adh, "Whosoever will meet Allah without associating anything in worship with Him will go to Paradise." Mu`adh asked the Prophet, "Should I not inform the people of this good news?" The Prophet (ﷺ) replied, "No, I am afraid, lest they should depend upon it (absolutely)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 3 · Knowledge

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।