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सहीह बुख़ारी

नंबर 102

नंबर 102किताब 3, नंबर 44
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ بَشَّارٍ، قَالَ حَدَّثَنَا غُنْدَرٌ، قَالَ حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الأَصْبَهَانِيِّ، عَنْ ذَكْوَانَ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم بِهَذَا‏.‏ وَعَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ الأَصْبَهَانِيِّ، قَالَ سَمِعْتُ أَبَا حَازِمٍ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ، قَالَ ‏ "‏ ثَلاَثَةً لَمْ يَبْلُغُوا الْحِنْثَ ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Sa`id Al-Khudri:as above (the sub narrators are different). Abu Huraira qualified the three children referred to in the above mentioned Hadith as not having reached the age of committing sins (i.e. age of puberty)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 3 · Knowledge

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।