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सहीह बुख़ारी

नंबर 1872

नंबर 1872किताब 29, नंबर 6
حَدَّثَنَا خَالِدُ بْنُ مَخْلَدٍ، حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ، قَالَ حَدَّثَنِي عَمْرُو بْنُ يَحْيَى، عَنْ عَبَّاسِ بْنِ سَهْلِ بْنِ سَعْدٍ، عَنْ أَبِي حُمَيْدٍ ـ رضى الله عنه ـ أَقْبَلْنَا مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم مِنْ تَبُوكَ حَتَّى أَشْرَفْنَا عَلَى الْمَدِينَةِ فَقَالَ ‏ "‏ هَذِهِ طَابَةُ ‏"‏‏.‏
Narrated Abu Humaid:We came with the Prophet (ﷺ) from Tabuk, and when we reached near Medina, the Prophet (ﷺ) said, "This is Tabah

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 29 · Virtues of Madinah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।