सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 1770

नंबर 1770किताब 25, नंबर 246
حَدَّثَنَا عُثْمَانُ بْنُ الْهَيْثَمِ، أَخْبَرَنَا ابْنُ جُرَيْجٍ، قَالَ عَمْرُو بْنُ دِينَارٍ قَالَ ابْنُ عَبَّاسٍ ـ رضى الله عنهما ـ كَانَ ذُو الْمَجَازِ وَعُكَاظٌ مَتْجَرَ النَّاسِ فِي الْجَاهِلِيَّةِ، فَلَمَّا جَاءَ الإِسْلاَمُ كَأَنَّهُمْ كَرِهُوا ذَلِكَ حَتَّى نَزَلَتْ ‏{‏لَيْسَ عَلَيْكُمْ جُنَاحٌ أَنْ تَبْتَغُوا فَضْلاً مِنْ رَبِّكُمْ‏}‏ فِي مَوَاسِمِ الْحَجِّ‏.‏
Narrated Ibn ' `Abbas:Dhul-Majaz and `Ukaz were the markets of the people during the Pre-Islamic period of ignorance. When the people embraced Islam, they disliked to do bargaining there till the following Holy Verses were revealed:-- There is no harm for you If you seek of the bounty Of your Lord (during Hajj by trading, etc)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Hajj (Pilgrimage)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।