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सहीह बुख़ारी

नंबर 1766

नंबर 1766किताब 25, नंबर 242
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، قَالَ عَمْرٌو عَنْ عَطَاءٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ ـ رضى الله عنهما ـ لَيْسَ التَّحْصِيبُ بِشَىْءٍ، إِنَّمَا هُوَ مَنْزِلٌ نَزَلَهُ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم‏.‏
Narrated Ibn `Abbas:Staying at Al-Mahassab is not one of the ceremonies (of Hajj), but Al-Mahassab is a place where Allah's Messenger (ﷺ) camped (during his Hajjat-al-Wida)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Hajj (Pilgrimage)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।