حَدَّثَنَا عَبْدُ الْمُتَعَالِ بْنُ طَالِبٍ، حَدَّثَنَا ابْنُ وَهْبٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي عَمْرُو بْنُ الْحَارِثِ، أَنَّ قَتَادَةَ، حَدَّثَهُ عَنْ أَنَسِ بْنِ مَالِكٍ ـ رضى الله عنه ـ حَدَّثَهُ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ صَلَّى الظُّهْرَ وَالْعَصْرَ، وَالْمَغْرِبَ وَالْعِشَاءَ، وَرَقَدَ رَقْدَةً بِالْمُحَصَّبِ، ثُمَّ رَكِبَ إِلَى الْبَيْتِ فَطَافَ بِهِ.
Narrated Anas bin Malik:The Prophet (ﷺ) offered the Zuhr, `Asr, Maghrib and `Isha' prayers and slept for a while at a place called Al-Mahassab and then he rode towards the Ka`ba and performed Tawaf (al-Wada)
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।