सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 1756

नंबर 1756किताब 25, नंबर 234
حَدَّثَنَا أَصْبَغُ بْنُ الْفَرَجِ، أَخْبَرَنَا ابْنُ وَهْبٍ، عَنْ عَمْرِو بْنِ الْحَارِثِ، عَنْ قَتَادَةَ، أَنَّ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ ـ رضى الله عنه ـ حَدَّثَهُ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم صَلَّى الظُّهْرَ وَالْعَصْرَ، وَالْمَغْرِبَ وَالْعِشَاءَ، ثُمَّ رَقَدَ رَقْدَةً بِالْمُحَصَّبِ، ثُمَّ رَكِبَ إِلَى الْبَيْتِ فَطَافَ بِهِ‏.‏ تَابَعَهُ اللَّيْثُ حَدَّثَنِي خَالِدٌ، عَنْ سَعِيدٍ، عَنْ قَتَادَةَ، أَنَّ أَنَسَ بْنَ مَالِكٍ ـ رضى الله عنه ـ حَدَّثَهُ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم‏.‏
Narrated Anas bin Malik:The Prophet (ﷺ) offered the Zuhr, `Asr, Maghrib and the `Isha' prayers and slept for a while at a place called Al-Muhassab and then rode to the Ka`ba and performed Tawaf round it

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Hajj (Pilgrimage)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।