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सहीह बुख़ारी

नंबर 1745

नंबर 1745किताब 25, नंबर 223
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ نُمَيْرٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ، قَالَ حَدَّثَنِي نَافِعٌ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ ـ رضى الله عنهما ـ أَنَّ الْعَبَّاسَ ـ رضى الله عنه ـ اسْتَأْذَنَ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم لِيَبِيتَ بِمَكَّةَ لَيَالِيَ مِنًى، مِنْ أَجْلِ سِقَايَتِهِ، فَأَذِنَ لَهُ‏.‏ تَابَعَهُ أَبُو أُسَامَةَ وَعُقْبَةُ بْنُ خَالِدٍ وَأَبُو ضَمْرَةَ‏.‏
Narrated Ibn `Umar:Al-Abbas asked the permission from the Prophet (ﷺ) to stay at Mecca during the nights of Mina in order to provide water to the people, so the Prophet (ﷺ) allowed him

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Hajj (Pilgrimage)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।