وَقَالَ لَنَا أَبُو نُعَيْمٍ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ ـ رضى الله عنهما ـ أَنَّهُ طَافَ طَوَافًا وَاحِدًا، ثُمَّ يَقِيلُ ثُمَّ يَأْتِي مِنًى ـ يَعْنِي يَوْمَ النَّحْرِ ـ. وَرَفَعَهُ عَبْدُ الرَّزَّاقِ أَخْبَرَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ.
Narrated Nafi' that Ibn 'Umar (ra) performed only one Tawaf. He would take an afternoon nap and then return to Mina. That was on the day of Nahr (slaughtering)
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।