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सहीह बुख़ारी

नंबर 1719

नंबर 1719किताब 25, नंबर 197
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا يَحْيَى، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، حَدَّثَنَا عَطَاءٌ، سَمِعَ جَابِرَ بْنَ عَبْدِ اللَّهِ ـ رضى الله عنهما ـ يَقُولُ كُنَّا لاَ نَأْكُلُ مِنْ لُحُومِ بُدْنِنَا فَوْقَ ثَلاَثِ مِنًى، فَرَخَّصَ لَنَا النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم فَقَالَ ‏ "‏ كُلُوا وَتَزَوَّدُوا ‏"‏‏.‏ فَأَكَلْنَا وَتَزَوَّدْنَا‏.‏ قُلْتُ لِعَطَاءٍ أَقَالَ حَتَّى جِئْنَا الْمَدِينَةَ قَالَ لاَ‏.‏
Narrated Ibn Juraij:`Ata' said, "I heard Jabir bin `Abdullah saying, 'We never ate the meat of the Budn for more than three days of Mina. Later, the Prophet (ﷺ) gave us permission by saying: 'Eat and take (meat) with you. So we ate (some) and took (some) with us.' " I asked `Ata', "Did Jabir say (that they went on eating the meat) till they reached Medina?" `Ata' replied, "No

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Hajj (Pilgrimage)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।