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सहीह बुख़ारी

नंबर 1710

नंबर 1710किताब 25, नंबर 188
حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، سَمِعَ خَالِدَ بْنَ الْحَارِثِ، حَدَّثَنَا عُبَيْدُ اللَّهِ بْنُ عُمَرَ، عَنْ نَافِعٍ، أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ ـ رضى الله عنه ـ كَانَ يَنْحَرُ فِي الْمَنْحَرِ‏.‏ قَالَ عُبَيْدُ اللَّهِ مَنْحَرِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم‏.‏
Narrated Nafi`:`Abdullah (bin `Umar), used to slaughter (his sacrifice) at the Manhar. ('Ubaidullah, a sub-narrator said, "The Manhar of Allah's Messenger (ﷺ)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Hajj (Pilgrimage)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।