सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 1704

नंबर 1704किताब 25, नंबर 182
حَدَّثَنَا أَبُو نُعَيْمٍ، حَدَّثَنَا زَكَرِيَّاءُ، عَنْ عَامِرٍ، عَنْ مَسْرُوقٍ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ قَالَتْ فَتَلْتُ لِهَدْىِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ـ تَعْنِي الْقَلاَئِدَ ـ قَبْلَ أَنْ يُحْرِمَ‏.‏
Narrated `Aisha:I twisted (the garlands) for the Hadis of the Prophet (ﷺ) before he assumed Ihram

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Hajj (Pilgrimage)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।