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सहीह बुख़ारी

नंबर 1702

नंबर 1702किताब 25, नंबर 180
حَدَّثَنَا أَبُو النُّعْمَانِ، حَدَّثَنَا عَبْدُ الْوَاحِدِ، حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ، عَنِ الأَسْوَدِ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ قَالَتْ كُنْتُ أَفْتِلُ الْقَلاَئِدَ لِلنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم فَيُقَلِّدُ الْغَنَمَ، وَيُقِيمُ فِي أَهْلِهِ حَلاَلاً‏.‏
Narrated `Aisha:I used to make the garlands for (the Hadis of) the Prophet (ﷺ) and he would garland the sheep (with them) and would stay with his family as a non-Muhrim

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Hajj (Pilgrimage)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।