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सहीह बुख़ारी

नंबर 1674

नंबर 1674किताब 25, नंबर 154
حَدَّثَنَا خَالِدُ بْنُ مَخْلَدٍ، حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ بِلاَلٍ، حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ سَعِيدٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي عَدِيُّ بْنُ ثَابِتٍ، قَالَ حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يَزِيدَ الْخَطْمِيُّ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو أَيُّوبَ الأَنْصَارِيُّ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم جَمَعَ فِي حَجَّةِ الْوَدَاعِ الْمَغْرِبَ وَالْعِشَاءَ بِالْمُزْدَلِفَةِ‏.‏
Narrated Abu Aiyub Al-Ansari:Allah's Messenger (ﷺ) offered the Maghrib and `Isha' prayers together at Al-Muzdalifa

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Hajj (Pilgrimage)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।