सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 1657

नंबर 1657किताब 25, नंबर 138
حَدَّثَنَا قَبِيصَةُ بْنُ عُقْبَةَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنِ الأَعْمَشِ، عَنْ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ يَزِيدَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ صَلَّيْتُ مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم رَكْعَتَيْنِ، وَمَعَ أَبِي بَكْرٍ ـ رضى الله عنه ـ رَكْعَتَيْنِ وَمَعَ عُمَرَ ـ رضى الله عنه ـ رَكْعَتَيْنِ، ثُمَّ تَفَرَّقَتْ بِكُمُ الطُّرُقُ، فَيَا لَيْتَ حَظِّي مِنْ أَرْبَعٍ رَكْعَتَانِ مُتَقَبَّلَتَانِ‏.‏
Narrated `Abdullah bin Mas`ud:I offered (only a) two rak`at prayer with the Prophet (at Mina), and similarly with Abu Bakr and with `Umar, and then you differed in opinions. Wish that I would be lucky enough to have two of the four rak`at accepted (by Allah)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Hajj (Pilgrimage)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।