حَدَّثَنَا الْمَكِّيُّ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، عَنِ ابْنِ جُرَيْجٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي عَمْرُو بْنُ دِينَارٍ، قَالَ سَمِعْتُ ابْنَ عُمَرَ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ قَدِمَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم مَكَّةَ، فَطَافَ بِالْبَيْتِ، ثُمَّ صَلَّى رَكْعَتَيْنِ، ثُمَّ سَعَى بَيْنَ الصَّفَا وَالْمَرْوَةِ، ثُمَّ تَلاَ {لَقَدْ كَانَ لَكُمْ فِي رَسُولِ اللَّهِ أُسْوَةٌ حَسَنَةٌ}.
Narrated `Amr bin Dinar:I heard Ibn `Umar saying, "The Prophet (ﷺ) arrived at Mecca and performed Tawaf of the Ka`ba and then offered a two-rak`at prayer and then performed Tawaf between Safa and Marwa." Ibn `Umar then recited (the verse): "Verily! In Allah's Messenger (ﷺ) you have a good example
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।