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सहीह बुख़ारी

नंबर 1625

नंबर 1625किताब 25, नंबर 109
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ أَبِي بَكْرٍ، حَدَّثَنَا فُضَيْلٌ، حَدَّثَنَا مُوسَى بْنُ عُقْبَةَ، أَخْبَرَنِي كُرَيْبٌ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَبَّاسٍ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ قَدِمَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم مَكَّةَ، فَطَافَ وَسَعَى بَيْنَ الصَّفَا وَالْمَرْوَةِ، وَلَمْ يَقْرَبِ الْكَعْبَةَ بَعْدَ طَوَافِهِ بِهَا حَتَّى رَجَعَ مِنْ عَرَفَةَ‏.‏
Narrated Ibn `Abbas:The Prophet (ﷺ) arrived at Mecca and performed Tawaf of the Ka`ba and Sa`i between Safa and Marwa, but he did not go near the Ka`ba after his Tawaf till he returned from `Arafat

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Hajj (Pilgrimage)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।