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सहीह बुख़ारी

नंबर 1619

नंबर 1619किताब 25, नंबर 104
حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، حَدَّثَنَا مَالِكٌ، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ نَوْفَلٍ، عَنْ عُرْوَةَ بْنِ الزُّبَيْرِ، عَنْ زَيْنَبَ بِنْتِ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ أُمِّ سَلَمَةَ ـ رضى الله عنها ـ زَوْجِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَتْ شَكَوْتُ إِلَى رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم أَنِّي أَشْتَكِي‏.‏ فَقَالَ ‏"‏ طُوفِي مِنْ وَرَاءِ النَّاسِ، وَأَنْتِ رَاكِبَةٌ ‏"‏‏.‏ فَطُفْتُ وَرَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم حِينَئِذٍ يُصَلِّي إِلَى جَنْبِ الْبَيْتِ، وَهْوَ يَقْرَأُ ‏{‏وَالطُّورِ * وَكِتَابٍ مَسْطُورٍ‏}‏
Narrated Um Salama:(the wife of the Prophet) I informed Allah's Messenger (ﷺ) that I was ill. So he said, "Perform the Tawaf while riding behind the people." I did so, and at that time the Prophet (ﷺ) was praying beside the Ka`ba and reciting Surat-at-Tur

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Hajj (Pilgrimage)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।