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सहीह बुख़ारी

नंबर 1593

नंबर 1593किताब 25, नंबर 79
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا إِبْرَاهِيمُ، عَنِ الْحَجَّاجِ بْنِ حَجَّاجٍ، عَنْ قَتَادَةَ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي عُتْبَةَ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ ـ رضى الله عنه ـ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَ ‏"‏ لَيُحَجَّنَّ الْبَيْتُ وَلَيُعْتَمَرَنَّ بَعْدَ خُرُوجِ يَأْجُوجَ وَمَأْجُوجَ ‏"‏‏.‏ تَابَعَهُ أَبَانُ وَعِمْرَانُ عَنْ قَتَادَةَ‏.‏ وَقَالَ عَبْدُ الرَّحْمَنِ عَنْ شُعْبَةَ قَالَ ‏"‏ لاَ تَقُومُ السَّاعَةُ حَتَّى لاَ يُحَجَّ الْبَيْتُ ‏"‏‏.‏ وَالأَوَّلُ أَكْثَرُ، سَمِعَ قَتَادَةُ عَبْدَ اللَّهِ وَعَبْدُ اللَّهِ أَبَا سَعِيدٍ‏.‏
Narrated Abu Sa`id Al-Khudri:The Prophet (ﷺ) said "The people will continue performing the Hajj and `Umra to the Ka`ba even after the appearance of Gog and Magog." Narrated Shu`ba extra: The Hour (Day of Judgment) will not be established till the Hajj (to the Ka`ba) is abandoned

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Hajj (Pilgrimage)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।