حَدَّثَنِي يَعْقُوبُ بْنُ إِبْرَاهِيمَ، حَدَّثَنَا ابْنُ عُلَيَّةَ، أَخْبَرَنَا أَيُّوبُ، عَنْ نَافِعٍ، قَالَ كَانَ ابْنُ عُمَرَ ـ رضى الله عنهما ـ إِذَا دَخَلَ أَدْنَى الْحَرَمِ أَمْسَكَ عَنِ التَّلْبِيَةِ، ثُمَّ يَبِيتُ بِذِي طُوًى، ثُمَّ يُصَلِّي بِهِ الصُّبْحَ وَيَغْتَسِلُ، وَيُحَدِّثُ أَنَّ نَبِيَّ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يَفْعَلُ ذَلِكَ.
Narrated Nafi`:On reaching the sanctuary of Mecca, Ibn `Umar used to stop, reciting Talbiya and then he would pass the night at Dhi-Tuwa and then offer the Fajr prayer and take a bath. He used to say that the Prophet (ﷺ) used to do the same
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।