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सहीह बुख़ारी

नंबर 1566

नंबर 1566किताब 25, नंबर 52
حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، قَالَ حَدَّثَنِي مَالِكٌ،‏.‏ وَحَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ، أَخْبَرَنَا مَالِكٌ، عَنْ نَافِعٍ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ، عَنْ حَفْصَةَ ـ رضى الله عنهم ـ زَوْجِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّهَا قَالَتْ يَا رَسُولَ اللَّهِ، مَا شَأْنُ النَّاسِ حَلُّوا بِعُمْرَةٍ وَلَمْ تَحْلِلْ أَنْتَ مِنْ عُمْرَتِكَ قَالَ ‏ "‏ إِنِّي لَبَّدْتُ رَأْسِي، وَقَلَّدْتُ هَدْيِي فَلاَ أَحِلُّ حَتَّى أَنْحَرَ ‏"‏‏.‏
Narrated Ibn `Umar:Hafsa the wife of the Prophet (ﷺ) said, "O Allah's Messenger (ﷺ)! Why have the people finished their Ihram after performing `Umra but you have not finished your Ihram after performing `Umra?" He replied, "I have matted my hair and garlanded my Hadi. So I will not finish my Ihram till I have slaughtered (my Hadi)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Hajj (Pilgrimage)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।