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सहीह बुख़ारी

नंबर 1555

नंबर 1555किताब 25, नंबर 41
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، قَالَ حَدَّثَنِي ابْنُ أَبِي عَدِيٍّ، عَنِ ابْنِ عَوْنٍ، عَنْ مُجَاهِدٍ، قَالَ كُنَّا عِنْدَ ابْنِ عَبَّاسٍ ـ رضى الله عنهما ـ فَذَكَرُوا الدَّجَّالَ أَنَّهُ قَالَ ‏"‏ مَكْتُوبٌ بَيْنَ عَيْنَيْهِ كَافِرٌ ‏"‏‏.‏ فَقَالَ ابْنُ عَبَّاسٍ لَمْ أَسْمَعْهُ وَلَكِنَّهُ قَالَ ‏"‏ أَمَّا مُوسَى كَأَنِّي أَنْظُرُ إِلَيْهِ إِذِ انْحَدَرَ فِي الْوَادِي يُلَبِّي ‏"‏‏.‏
Narrated Mujahid:I was in the company of Ibn `Abbas and the people talked about Ad-Dajjal and said, "Ad-Dajjal will come with the word Kafir (non-believer) written in between his eyes." On that Ibn `Abbas said, "I have not heard this from the Prophet (ﷺ) but I heard him saying, 'As if I saw Moses just now entering the valley reciting Talbyia

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Hajj (Pilgrimage)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।