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सहीह बुख़ारी

नंबर 1548

नंबर 1548किताब 25, नंबर 34
حَدَّثَنَا سُلَيْمَانُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا حَمَّادُ بْنُ زَيْدٍ، عَنْ أَيُّوبَ، عَنْ أَبِي قِلاَبَةَ، عَنْ أَنَسٍ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ صَلَّى النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم بِالْمَدِينَةِ الظُّهْرَ أَرْبَعًا، وَالْعَصْرَ بِذِي الْحُلَيْفَةِ رَكْعَتَيْنِ، وَسَمِعْتُهُمْ يَصْرُخُونَ بِهِمَا جَمِيعًا‏.‏
Narrated Anas:The Prophet (ﷺ) offered four rak`at of the Zuhr prayer in Medina and two rak`at of the `Asr prayer in Dhul-Hulaifa and I heard them (the companions of the Prophet) reciting Talbiya together loudly to the extent of shouting

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Hajj (Pilgrimage)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।