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सहीह बुख़ारी

नंबर 1534

नंबर 1534किताब 25, नंबर 22
حَدَّثَنَا الْحُمَيْدِيُّ، حَدَّثَنَا الْوَلِيدُ، وَبِشْرُ بْنُ بَكْرٍ التِّنِّيسِيُّ، قَالاَ حَدَّثَنَا الأَوْزَاعِيُّ، قَالَ حَدَّثَنِي يَحْيَى، قَالَ حَدَّثَنِي عِكْرِمَةُ، أَنَّهُ سَمِعَ ابْنَ عَبَّاسٍ ـ رضى الله عنهما ـ يَقُولُ إِنَّهُ سَمِعَ عُمَرَ ـ رضى الله عنه ـ يَقُولُ سَمِعْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم بِوَادِي الْعَقِيقِ يَقُولُ ‏ "‏ أَتَانِي اللَّيْلَةَ آتٍ مِنْ رَبِّي فَقَالَ صَلِّ فِي هَذَا الْوَادِي الْمُبَارَكِ وَقُلْ عُمْرَةً فِي حَجَّةٍ ‏"‏‏.‏
Narrated `Umar:In the valley of Al-`Aqiq I heard Allah's Messenger (ﷺ) saying, "To night a messenger came to me from my Lord and asked me to pray in this blessed valley and to assume Ihram for Hajj and `Umra together

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 25 · Hajj (Pilgrimage)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।