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सहीह बुख़ारी

नंबर 1512

नंबर 1512किताब 24, नंबर 112
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، حَدَّثَنَا يَحْيَى، عَنْ عُبَيْدِ اللَّهِ، قَالَ حَدَّثَنِي نَافِعٌ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ فَرَضَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم صَدَقَةَ الْفِطْرِ صَاعًا مِنْ شَعِيرٍ، أَوْ صَاعًا مِنْ تَمْرٍ عَلَى الصَّغِيرِ وَالْكَبِيرِ وَالْحُرِّ وَالْمَمْلُوكِ‏.‏
Narrated Ibn `Umar:Allah's Messenger (ﷺ) has made Sadaqat-ul-Fitr obligatory, (and it was), either one Sa' of barley or one Sa' of dates (and its payment was obligatory) on young and old people, and on free men as well as on slaves

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · Obligatory Charity Tax (Zakat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।