حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ فَضَالَةَ، حَدَّثَنَا أَبُو عُمَرَ، عَنْ زَيْدٍ، عَنْ عِيَاضِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ سَعْدٍ، عَنْ أَبِي سَعِيدٍ الْخُدْرِيِّ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ كُنَّا نُخْرِجُ فِي عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَوْمَ الْفِطْرِ صَاعًا مِنْ طَعَامٍ. وَقَالَ أَبُو سَعِيدٍ وَكَانَ طَعَامَنَا الشَّعِيرُ وَالزَّبِيبُ وَالأَقِطُ وَالتَّمْرُ.
Narrated Abu Sa`id Al-Khudri:In the lifetime of Allah's Messenger (ﷺ) , we used to give one Sa' of food (edible things) as Sadaqat-ul-Fitr (to the poor). Our food used to be either of barley, raisins (dried grapes), cottage cheese or dates
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।