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सहीह बुख़ारी

नंबर 1506

नंबर 1506किताब 24, नंबर 106
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ، أَخْبَرَنَا مَالِكٌ، عَنْ زَيْدِ بْنِ أَسْلَمَ، عَنْ عِيَاضِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ سَعْدِ بْنِ أَبِي سَرْحٍ الْعَامِرِيِّ، أَنَّهُ سَمِعَ أَبَا سَعِيدٍ الْخُدْرِيَّ ـ رضى الله عنه ـ يَقُولُ كُنَّا نُخْرِجُ زَكَاةَ الْفِطْرِ صَاعًا مِنْ طَعَامٍ، أَوْ صَاعًا مِنْ شَعِيرٍ، أَوْ صَاعًا مِنْ تَمْرٍ، أَوْ صَاعًا مِنْ أَقِطٍ، أَوْ صَاعًا مِنْ زَبِيبٍ‏.‏
Narrated Abu Sa`id Al-Khudri:We used to give one Sa' of meal or one Sa' of barley or one Sa' of dates, or one Sa' of cottage cheese or one Sa' of Raisins (dried grapes) as Zakat-ul-Fitr

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · Obligatory Charity Tax (Zakat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।