حَدَّثَنَا آدَمُ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ زِيَادٍ، قَالَ سَمِعْتُ أَبَا هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ أَخَذَ الْحَسَنُ بْنُ عَلِيٍّ ـ رضى الله عنهما ـ تَمْرَةً مِنْ تَمْرِ الصَّدَقَةِ، فَجَعَلَهَا فِي فِيهِ، فَقَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم " كِخٍ كِخٍ ـ لِيَطْرَحَهَا ثُمَّ قَالَ ـ أَمَا شَعَرْتَ أَنَّا لاَ نَأْكُلُ الصَّدَقَةَ ".
Narrated Abu Huraira:Al-Hasan bin `Ali took a date from the dates given in charity and put it in his mouth. The Prophet (ﷺ) said, "Expel it from your mouth. Don't you know that we do not eat a thing which is given in charity?
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।