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सहीह बुख़ारी

नंबर 1446

नंबर 1446किताब 24, नंबर 49
حَدَّثَنَا أَحْمَدُ بْنُ يُونُسَ، حَدَّثَنَا أَبُو شِهَابٍ، عَنْ خَالِدٍ الْحَذَّاءِ، عَنْ حَفْصَةَ بِنْتِ سِيرِينَ، عَنْ أُمِّ عَطِيَّةَ ـ رضى الله عنها ـ قَالَتْ بُعِثَ إِلَى نُسَيْبَةَ الأَنْصَارِيَّةِ بِشَاةٍ فَأَرْسَلَتْ إِلَى عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ مِنْهَا فَقَالَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم ‏"‏ عِنْدَكُمْ شَىْءٌ ‏"‏‏.‏ فَقُلْتُ لاَ إِلاَّ مَا أَرْسَلَتْ بِهِ نُسَيْبَةُ مِنْ تِلْكَ الشَّاةِ فَقَالَ ‏"‏ هَاتِ فَقَدْ بَلَغَتْ مَحِلَّهَا ‏"‏‏.‏
Narrated Um 'Atiyya:A sheep was sent to me (Nusaiba Al-Ansariya) (in charity) and I sent some of it to `Aisha. The Prophet asked `Aisha for something to eat. `Aisha replied that there was nothing except what Nusaiba Al-Ansariya had sent of that sheep. The Prophet (ﷺ) said to her, "Bring it as it has reached its place

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · Obligatory Charity Tax (Zakat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।