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सहीह बुख़ारी

नंबर 1430

नंबर 1430किताब 24, नंबर 33
حَدَّثَنَا أَبُو عَاصِمٍ، عَنْ عُمَرَ بْنِ سَعِيدٍ، عَنِ ابْنِ أَبِي مُلَيْكَةَ، أَنَّ عُقْبَةَ بْنَ الْحَارِثِ ـ رضى الله عنه ـ حَدَّثَهُ قَالَ صَلَّى بِنَا النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم الْعَصْرَ، فَأَسْرَعَ ثُمَّ دَخَلَ الْبَيْتَ، فَلَمْ يَلْبَثْ أَنْ خَرَجَ، فَقُلْتُ أَوْ قِيلَ لَهُ فَقَالَ ‏ "‏ كُنْتُ خَلَّفْتُ فِي الْبَيْتِ تِبْرًا مِنَ الصَّدَقَةِ، فَكَرِهْتُ أَنْ أُبَيِّتَهُ فَقَسَمْتُهُ ‏"‏‏.‏
Narrated `Uqba bin Al-Harith:Once the Prophet (ﷺ) offered the `Asr prayer and then hurriedly went to his house and returned immediately. I (or somebody else) asked him (as to what was the matter) and he said, "I left at home a piece of gold which was from the charity and I disliked to let it remain a night in my house, so I got it distributed

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 24 · Obligatory Charity Tax (Zakat)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।