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सहीह बुख़ारी

नंबर 1394

नंबर 1394किताब 23, नंबर 148
حَدَّثَنَا عُمَرُ بْنُ حَفْصٍ، حَدَّثَنَا أَبِي، حَدَّثَنَا الأَعْمَشُ، حَدَّثَنِي عَمْرُو بْنُ مُرَّةَ، عَنْ سَعِيدِ بْنِ جُبَيْرٍ، عَنِ ابْنِ عَبَّاسٍ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ قَالَ أَبُو لَهَبٍ ـ عَلَيْهِ لَعْنَةُ اللَّهِ ـ لِلنَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم تَبًّا لَكَ سَائِرَ الْيَوْمِ‏.‏ فَنَزَلَتْ ‏{‏تَبَّتْ يَدَا أَبِي لَهَبٍ وَتَبَّ‏}‏ ‏.‏
Narrated Ibn `Abbas.:Abu Lahab, may Allah curse him, once said to the Prophet (ﷺ), "Perish you all the day." Then the Divine Inspiration came: "Perish the hands of Abi Lahab! And perish he

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 23 · Funerals (Al-Janaa'iz)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।