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सहीह बुख़ारी

नंबर 1389

नंबर 1389किताब 23, नंबर 141
حَدَّثَنَا إِسْمَاعِيلُ، حَدَّثَنِي سُلَيْمَانُ، عَنْ هِشَامٍ، وَحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ حَرْبٍ، حَدَّثَنَا أَبُو مَرْوَانَ، يَحْيَى بْنُ أَبِي زَكَرِيَّاءَ عَنْ هِشَامٍ، عَنْ عُرْوَةَ، عَنْ عَائِشَةَ، قَالَتْ إِنْ كَانَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم لَيَتَعَذَّرُ فِي مَرَضِهِ ‏ "‏ أَيْنَ أَنَا الْيَوْمَ أَيْنَ أَنَا غَدًا ‏"‏ اسْتِبْطَاءً لِيَوْمِ عَائِشَةَ، فَلَمَّا كَانَ يَوْمِي قَبَضَهُ اللَّهُ بَيْنَ سَحْرِي وَنَحْرِي، وَدُفِنَ فِي بَيْتِي‏.‏
Narrated `Aisha:During his sickness, Allah's Messenger (ﷺ) was asking repeatedly, "Where am I today? Where will I be tomorrow?" And I was waiting for the day of my turn (impatiently). Then, when my turn came, Allah took his soul away (in my lap) between my chest and arms and he was buried in my house

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 23 · Funerals (Al-Janaa'iz)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।