सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 1375

नंबर 1375किताब 23, नंबर 127
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ الْمُثَنَّى، حَدَّثَنَا يَحْيَى، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، قَالَ حَدَّثَنِي عَوْنُ بْنُ أَبِي جُحَيْفَةَ، عَنْ أَبِيهِ، عَنِ الْبَرَاءِ بْنِ عَازِبٍ، عَنْ أَبِي أَيُّوبَ ـ رضى الله عنهم ـ قَالَ خَرَجَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم وَقَدْ وَجَبَتِ الشَّمْسُ، فَسَمِعَ صَوْتًا فَقَالَ ‏ "‏ يَهُودُ تُعَذَّبُ فِي قُبُورِهَا ‏"‏‏.‏ وَقَالَ النَّضْرُ أَخْبَرَنَا شُعْبَةُ، حَدَّثَنَا عَوْنٌ، سَمِعْتُ أَبِي، سَمِعْتُ الْبَرَاءَ، عَنْ أَبِي أَيُّوبَ ـ رضى الله عنهما ـ عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم‏.‏
Narrated Abi Aiyub:Once the Prophet (ﷺ) went out after sunset and heard a dreadful voice, and said, "The Jews are being punished in their graves

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 23 · Funerals (Al-Janaa'iz)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।