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सहीह बुख़ारी

नंबर 1240

नंबर 1240किताब 23, नंबर 4
حَدَّثَنَا مُحَمَّدٌ، حَدَّثَنَا عَمْرُو بْنُ أَبِي سَلَمَةَ، عَنِ الأَوْزَاعِيِّ، قَالَ أَخْبَرَنِي ابْنُ شِهَابٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي سَعِيدُ بْنُ الْمُسَيَّبِ، أَنَّ أَبَا هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ سَمِعْتُ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم يَقُولُ ‏ "‏ حَقُّ الْمُسْلِمِ عَلَى الْمُسْلِمِ خَمْسٌ رَدُّ السَّلاَمِ، وَعِيَادَةُ الْمَرِيضِ، وَاتِّبَاعُ الْجَنَائِزِ، وَإِجَابَةُ الدَّعْوَةِ، وَتَشْمِيتُ الْعَاطِسِ ‏"‏‏.‏ تَابَعَهُ عَبْدُ الرَّزَّاقِ قَالَ أَخْبَرَنَا مَعْمَرٌ‏.‏ وَرَوَاهُ سَلاَمَةُ عَنْ عُقَيْلٍ‏.‏
Narrated Abu Huraira:I heard Allah's Messenger (ﷺ) saying, "The rights of a Muslim on the Muslims are five: to respond to the salaam, visiting the sick, to follow the funeral processions, to accept an invitation, and to reply to those who sneeze. (see Hadith)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 23 · Funerals (Al-Janaa'iz)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।