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सहीह बुख़ारी

नंबर 1188

नंबर 1188किताब 20, नंबर 1
حَدَّثَنَا حَفْصُ بْنُ عُمَرَ، حَدَّثَنَا شُعْبَةُ، قَالَ أَخْبَرَنِي عَبْدُ الْمَلِكِ بْنُ عُمَيْرٍ، عَنْ قَزَعَةَ، قَالَ سَمِعْتُ أَبَا سَعِيدٍ ـ رضى الله عنه ـ أَرْبَعًا قَالَ سَمِعْتُ مِنَ النَّبِيِّ، صلى الله عليه وسلم وَكَانَ غَزَا مَعَ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم ثِنْتَىْ عَشْرَةَ غَزْوَةً ح‏.‏
Narrated Quza'a: I heard Abu Said saying four words. He said, "I heard the Prophet (ﷺ) (saying the following narrative)." He had participated in twelve holy battles with the Prophet

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 20 · Virtues of Prayer at Masjid Makkah and Madinah

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।