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सहीह बुख़ारी

नंबर 24

नंबर 24किताब 2, नंबर 17
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ يُوسُفَ، قَالَ أَخْبَرَنَا مَالِكُ بْنُ أَنَسٍ، عَنِ ابْنِ شِهَابٍ، عَنْ سَالِمِ بْنِ عَبْدِ اللَّهِ، عَنْ أَبِيهِ، أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم مَرَّ عَلَى رَجُلٍ مِنَ الأَنْصَارِ وَهُوَ يَعِظُ أَخَاهُ فِي الْحَيَاءِ، فَقَالَ رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ دَعْهُ فَإِنَّ الْحَيَاءَ مِنَ الإِيمَانِ ‏"‏‏.‏
Narrated 'Abdullah (bin 'Umar): Once Allah's Messenger (ﷺ) passed by an Ansari (man) who was admonishing his brother regarding Haya'. On that Allah's Messenger (ﷺ) said, "Leave him as Haya' is a part of faith." (See Hadith)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 2 · Belief

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।