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सहीह बुख़ारी

नंबर 1175

नंबर 1175किताब 19, नंबर 53
حَدَّثَنَا مُسَدَّدٌ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى، عَنْ شُعْبَةَ، عَنْ تَوْبَةَ، عَنْ مُوَرِّقٍ، قَالَ قُلْتُ لاِبْنِ عُمَرَ ـ رضى الله عنهما ـ أَتُصَلِّي الضُّحَى قَالَ لاَ‏.‏ قُلْتُ فَعُمَرُ‏.‏ قَالَ لاَ‏.‏ قُلْتُ فَأَبُو بَكْرٍ‏.‏ قَالَ لاَ‏.‏ قُلْتُ فَالنَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم قَالَ لاَ إِخَالُهُ‏.‏
Narrated Muwarriq:I asked Ibn `Umar "Do you offer the Duha prayer?" He replied in the negative. I further asked, "Did `Umar use to pray it?" He (Ibn `Umar) replied in the negative. I again asked, "Did Abu Bakr use to pray it?" He replied in the negative. I again asked, "Did the Prophet (ﷺ) use to pray it?" Ibn `Umar replied, "I don't think he did

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 19 · Prayer at Night (Tahajjud)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।