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सहीह बुख़ारी

नंबर 1161

नंबर 1161किताब 19, नंबर 40
حَدَّثَنَا بِشْرُ بْنُ الْحَكَمِ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، قَالَ حَدَّثَنِي سَالِمٌ أَبُو النَّضْرِ، عَنْ أَبِي سَلَمَةَ، عَنْ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ إِذَا صَلَّى ‏{‏سُنَّةَ الْفَجْرِ‏}‏ فَإِنْ كُنْتُ مُسْتَيْقِظَةً حَدَّثَنِي وَإِلاَّ اضْطَجَعَ حَتَّى يُؤْذَنَ بِالصَّلاَةِ‏.‏
Narrated `Aisha:After offering the Sunna of the Fajr prayer, the Prophet (ﷺ) used to talk to me, if I happened to be awake; otherwise he would lie down till the Iqama call was proclaimed (for the Fajr prayer)

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 19 · Prayer at Night (Tahajjud)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।