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सहीह बुख़ारी

नंबर 1152

नंबर 1152किताब 19, नंबर 33
حَدَّثَنَا عَبَّاسُ بْنُ الْحُسَيْنِ، حَدَّثَنَا مُبَشِّرٌ، عَنِ الأَوْزَاعِيِّ،‏.‏ وَحَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ مُقَاتِلٍ أَبُو الْحَسَنِ، قَالَ أَخْبَرَنَا عَبْدُ اللَّهِ، أَخْبَرَنَا الأَوْزَاعِيُّ، قَالَ حَدَّثَنِي يَحْيَى بْنُ أَبِي كَثِيرٍ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو سَلَمَةَ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، قَالَ حَدَّثَنِي عَبْدُ اللَّهِ بْنُ عَمْرِو بْنِ الْعَاصِ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ قَالَ لِي رَسُولُ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ يَا عَبْدَ اللَّهِ، لاَ تَكُنْ مِثْلَ فُلاَنٍ، كَانَ يَقُومُ اللَّيْلَ فَتَرَكَ قِيَامَ اللَّيْلِ ‏"‏‏.‏ وَقَالَ هِشَامٌ حَدَّثَنَا ابْنُ أَبِي الْعِشْرِينَ، حَدَّثَنَا الأَوْزَاعِيُّ، قَالَ حَدَّثَنِي يَحْيَى، عَنْ عُمَرَ بْنِ الْحَكَمِ بْنِ ثَوْبَانَ، قَالَ حَدَّثَنِي أَبُو سَلَمَةَ، مِثْلَهُ‏.‏ وَتَابَعَهُ عَمْرُو بْنُ أَبِي سَلَمَةَ عَنِ الأَوْزَاعِيِّ،‏.‏
Narrated `Abdullah bin `Amr bin Al-`As:Allah's Messenger (ﷺ) said to me, "O `Abdullah! Do not be like so and so who used to pray at night and then stopped the night prayer

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 19 · Prayer at Night (Tahajjud)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।