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सहीह बुख़ारी

नंबर 1137

नंबर 1137किताब 19, नंबर 18
حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ، قَالَ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، قَالَ أَخْبَرَنِي سَالِمُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، أَنَّ عَبْدَ اللَّهِ بْنَ عُمَرَ ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ إِنَّ رَجُلاً قَالَ يَا رَسُولَ اللَّهِ، كَيْفَ صَلاَةُ اللَّيْلِ قَالَ ‏ "‏ مَثْنَى مَثْنَى، فَإِذَا خِفْتَ الصُّبْحَ فَأَوْتِرْ بِوَاحِدَةٍ ‏"‏‏.‏
Narrated `Abdullah bin `Umar:A man said, "O Allah's Messenger (ﷺ)! How is the prayer of the night?" He said, "Two rak`at followed by two rak`at and so on, and when you apprehend the approaching dawn, offer one rak`a as witr

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 19 · Prayer at Night (Tahajjud)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।