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सहीह बुख़ारी

नंबर 1132

नंबर 1132किताब 19, नंबर 12
حَدَّثَنِي عَبْدَانُ، قَالَ أَخْبَرَنِي أَبِي، عَنْ شُعْبَةَ، عَنْ أَشْعَثَ، سَمِعْتُ أَبِي قَالَ، سَمِعْتُ مَسْرُوقًا، قَالَ سَأَلْتُ عَائِشَةَ ـ رضى الله عنها ـ أَىُّ الْعَمَلِ كَانَ أَحَبَّ إِلَى النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم قَالَتِ الدَّائِمُ‏.‏ قُلْتُ مَتَى كَانَ يَقُومُ قَالَتْ يَقُومُ إِذَا سَمِعَ الصَّارِخَ‏
Narrated Masruq:I asked `Aisha which deed was most loved by the Prophet. She said, "A deed done continuously." I further asked, "When did he used to get up (in the night for the prayer)." She said, "He used to get up on hearing the crowing of a cock

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 19 · Prayer at Night (Tahajjud)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।