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सहीह बुख़ारी

नंबर 1105

नंबर 1105किताब 18, नंबर 25
حَدَّثَنَا أَبُو الْيَمَانِ، قَالَ أَخْبَرَنَا شُعَيْبٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، قَالَ أَخْبَرَنِي سَالِمُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، عَنِ ابْنِ عُمَرَ ـ رضى الله عنهما ـ أَنَّ رَسُولَ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم كَانَ يُسَبِّحُ عَلَى ظَهْرِ رَاحِلَتِهِ حَيْثُ كَانَ وَجْهُهُ، يُومِئُ بِرَأْسِهِ، وَكَانَ ابْنُ عُمَرَ يَفْعَلُهُ‏.‏
Narrated Salim bin `Abdullah:Ibn `Umar said, "Allah's Messenger (ﷺ) used to pray the Nawafil on the back of his Mount (carriage) by signs facing any direction." Ibn `Umar used to do the same

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 18 · Shortening the Prayers (At-Taqseer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।