सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 1099

नंबर 1099किताब 18, नंबर 19
حَدَّثَنَا مُعَاذُ بْنُ فَضَالَةَ، قَالَ حَدَّثَنَا هِشَامٌ، عَنْ يَحْيَى، عَنْ مُحَمَّدِ بْنِ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ ثَوْبَانَ، قَالَ حَدَّثَنِي جَابِرُ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، أَنَّ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم كَانَ يُصَلِّي عَلَى رَاحِلَتِهِ نَحْوَ الْمَشْرِقِ فَإِذَا أَرَادَ أَنْ يُصَلِّيَ الْمَكْتُوبَةَ نَزَلَ فَاسْتَقْبَلَ الْقِبْلَةَ‏.‏
Narrated Jabir bin `Abdullah:The Prophet (ﷺ) used to pray (the Nawafil) on his Mount facing east and whenever he wanted to offer the compulsory prayer, he used to dismount and face the Qibla

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 18 · Shortening the Prayers (At-Taqseer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।