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सहीह बुख़ारी

नंबर 1093

नंबर 1093किताब 18, नंबर 13
حَدَّثَنَا عَلِيُّ بْنُ عَبْدِ اللَّهِ، قَالَ حَدَّثَنَا عَبْدُ الأَعْلَى، قَالَ حَدَّثَنَا مَعْمَرٌ، عَنِ الزُّهْرِيِّ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَامِرٍ، عَنْ أَبِيهِ، قَالَ رَأَيْتُ النَّبِيَّ صلى الله عليه وسلم يُصَلِّي عَلَى رَاحِلَتِهِ حَيْثُ تَوَجَّهَتْ بِهِ‏.‏
Narrated `Abdullah bin 'Amir from his father who said:I saw the Prophet (ﷺ) offering the prayer on his mount (Rahila) whatever direction it took

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 18 · Shortening the Prayers (At-Taqseer)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।