सीधे कंटेंट पर जाएँ
सहीह बुख़ारी

नंबर 1068

नंबर 1068किताब 17, नंबर 2
حَدَّثَنَا مُحَمَّدُ بْنُ يُوسُفَ، حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ سَعْدِ بْنِ إِبْرَاهِيمَ، عَنْ عَبْدِ الرَّحْمَنِ، عَنْ أَبِي هُرَيْرَةَ ـ رضى الله عنه ـ قَالَ كَانَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم يَقْرَأُ فِي الْجُمُعَةِ فِي صَلاَةِ الْفَجْرِ ‏{‏الم * تَنْزِيلُ‏}‏ السَّجْدَةَ وَ‏{‏هَلْ أَتَى عَلَى الإِنْسَانِ‏}‏
Narrated Abu Huraira:On Fridays the Prophet (ﷺ) used to recite Alif Lam Mim Tanzil-As-Sajda (in the first rak`a) and Hal ata `alal-insani i.e. Surat ad-Dahr (LXXVI) (in the second rak`a), in the Fajr prayer

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 17 · Prostration During Recital of Qur'an

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।