حَدَّثَنَا إِسْحَاقُ، قَالَ أَخْبَرَنَا يَحْيَى بْنُ صَالِحٍ، قَالَ حَدَّثَنَا مُعَاوِيَةُ بْنُ سَلاَّمِ بْنِ أَبِي سَلاَّمٍ الْحَبَشِيُّ الدِّمَشْقِيُّ، قَالَ حَدَّثَنَا يَحْيَى بْنُ أَبِي كَثِيرٍ، قَالَ أَخْبَرَنِي أَبُو سَلَمَةَ بْنُ عَبْدِ الرَّحْمَنِ بْنِ عَوْفٍ الزُّهْرِيُّ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ عَمْرٍو ـ رضى الله عنهما ـ قَالَ لَمَّا كَسَفَتِ الشَّمْسُ عَلَى عَهْدِ رَسُولِ اللَّهِ صلى الله عليه وسلم نُودِيَ إِنَّ الصَّلاَةَ جَامِعَةٌ.
Narrated `Abdullah bin `Amr:"When the sun eclipsed in the lifetime of Allah's Messenger (ﷺ) an announcement was made that a prayer was to be offered in congregation
स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।
हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।
अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।