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सहीह बुख़ारी

नंबर 1030

नंबर 1030किताब 15, नंबर 25
وَقَالَ الأُوَيْسِيُّ حَدَّثَنِي مُحَمَّدُ بْنُ جَعْفَرٍ، عَنْ يَحْيَى بْنِ سَعِيدٍ، وَشَرِيكٍ، سَمِعَا أَنَسًا، عَنِ النَّبِيِّ صلى الله عليه وسلم أَنَّهُ رَفَعَ يَدَيْهِ حَتَّى رَأَيْتُ بَيَاضَ إِبْطَيْهِ‏.‏
The narrator Anas added that the Prophet (ﷺ) raised his hands (during the invocation) to such an extent that the whiteness of his armpits was visible

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · Invoking Allah for Rain (Istisqaa)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।