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सहीह बुख़ारी

नंबर 1027

नंबर 1027किताब 15, नंबर 22
حَدَّثَنَا عَبْدُ اللَّهِ بْنُ مُحَمَّدٍ، قَالَ حَدَّثَنَا سُفْيَانُ، عَنْ عَبْدِ اللَّهِ بْنِ أَبِي بَكْرٍ، سَمِعَ عَبَّادَ بْنَ تَمِيمٍ، عَنْ عَمِّهِ، قَالَ خَرَجَ النَّبِيُّ صلى الله عليه وسلم إِلَى الْمُصَلَّى يَسْتَسْقِي، وَاسْتَقْبَلَ الْقِبْلَةَ فَصَلَّى رَكْعَتَيْنِ، وَقَلَبَ رِدَاءَهُ‏.‏ قَالَ سُفْيَانُ فَأَخْبَرَنِي الْمَسْعُودِيُّ عَنْ أَبِي بَكْرٍ قَالَ جَعَلَ الْيَمِينَ عَلَى الشِّمَالِ‏.‏
Narrated `Abbad bin Tamim from his uncle who said:"The Prophet (ﷺ) went out to the Musalla to offer the Istisqa' prayer, faced the Qibla and offered a two rak`at prayer and turned his cloak inside out." Narrated Abu Bakr, "The Prophet (ﷺ) put the right side of his cloak on his left side

स्रोत में इस रिवायत का कोई दर्जा दर्ज नहीं है।

हर रिवायत के नीचे डेटासेट का अपना तर्जुमा है, जैसा है वैसा ही दिखाया गया है। इसमें तर्जुमा करने वाले का नाम नहीं है, इसके हुक़ूक़ की तस्दीक़ नहीं हुई है, और किसी ने इसे अरबी से मिलाकर नहीं जाँचा है; कुछ रिवायतों का तर्जुमा है ही नहीं। असल टेक्स्ट अरबी है। डेटासेट में इस किताब का इस भाषा में कोई तर्जुमा नहीं है, इसलिए अंग्रेज़ी दिखाई जा रही है।

किताब 15 · Invoking Allah for Rain (Istisqaa)

अरबी टेक्स्ट, नंबरिंग, किताबों के नाम और दर्जे ठीक वैसे ही दिखाए गए हैं जैसे वे एक खुले डेटासेट (hadith-api) में हैं। सबील ने अभी न उसके सही होने की तस्दीक़ की है, न उसके हुक़ूक़ की, और उसकी इल्मी जाँच अभी शुरू नहीं हुई है। तब तक किसी रिवायत पर भरोसा करने से पहले उसे किसी छपे हुए एडिशन से मिला लें।